Sunday, May 18, 2014

30 देशों के 140 डेलिगेट्स भारत के चुनावी प्रक्रिया से अवगत हुए

दो महीने से भी अधिक समय तक चले भारतीय आम चुनाव को देखने-समझने के लिए दुनिया भर के 30 देशों से 140 डेलिगेट्स भारत आए थे...
इन लोगों ने अलग-अलग राज्यों में जाकर चुनावी प्रक्रिया को देखा और समझा कि किस तरह से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सफलतापूर्वक चुनाव का संचालन किया जाता है..
2014 लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय चुनाव आयोग ने एक इलेक्शन विजिटर्स प्रोग्राम चलाया   जिसके तहत दूसरे देशों के लोगों को भारतीय चुनावी प्रक्रिया से रुबरु होने का मौका मिला।
नाम्बिया, नाइजिरिया, लेसेथो, मलेशिया, मारिशस, म्यान्मार, नेपाल, केन्या, मिस्र, सउदी अरब, इराक, ओमन आदि देशों से आए डेलिगेट्स ने देश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया।  
इन डेलिगेट्स को पहले अलग अलग समूहो में बांटा गया फिर प्रत्येक समूह को चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया से अवगत कराया। फिर उन लोगों को चुनाव क्षेत्रों के दौरे पर ले जाया गया। कर्नाटक, यूपी, बंगालहिमाचल और दिल्ली के दौरे पर जाकर इन लोगों ने चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कार्य प्रणाली का सूक्ष्मता से अध्ययन किया। 
इस दौरान डेलिगेट्स चुनावी प्रक्रिया, इसमें तकनीक का प्रयोग और चुनाव आयोग की कार्य-प्रणाली से बहुत प्रभावित हुए..

Saturday, May 17, 2014








बिहार में लोकसभा चुनाव के नतीजे
Party
Won
Leading
Total
Bharatiya Janata Party
22
0
22
Indian National Congress
2
0
2
Nationalist Congress Party
1
0
1
Janata Dal (United)
2
0
2
Lok Jan Shakti Party
6
0
6
Rashtriya Janata Dal
4
0
4
Rashtriya Lok Samta Party
3
0
3
Total
40
0
40

नीतीश के अच्छे दिन चले गए!

अब क्या करुं?

लोकसभा चुनाव के नतीजे


                                      लोकसभा चुनाव के नतीजे

ALL INDIA Result Status
Status Known For 543 out of 543 Constituencies
Party
Won
Leading
Total
Bharatiya Janata Party
282
0
282
Communist Party of India
1
0
1
Communist Party of India (Marxist)
9
0
9
Indian National Congress
44
0
44
Nationalist Congress Party
6
0
6
Aam Aadmi Party
4
0
4
All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam
37
0
37
All India N.R. Congress
1
0
1
All India Trinamool Congress
34
0
34
All India United Democratic Front
3
0
3
Biju Janata Dal
20
0
20
Indian National Lok Dal
2
0
2
Indian Union Muslim League
2
0
2
Jammu & Kashmir Peoples Democratic Party
3
0
3
Janata Dal (Secular)
2
0
2
Janata Dal (United)
2
0
2
Jharkhand Mukti Morcha
2
0
2
Kerala Congress (M)
1
0
1
Lok Jan Shakti Party
6
0
6
Naga Peoples Front
1
0
1
National Peoples Party
1
0
1
Pattali Makkal Katchi
1
0
1
Rashtriya Janata Dal
4
0
4
Revolutionary Socialist Party
1
0
1
Samajwadi Party
5
0
5
Shiromani Akali Dal
4
0
4
Shivsena
18
0
18
Sikkim Democratic Front
1
0
1
Telangana Rashtra Samithi
11
0
11
Telugu Desam
9
7
16
All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen
1
0
1
Apna Dal
2
0
2
Rashtriya Lok Samta Party
3
0
3
Swabhimani Paksha
1
0
1
Yuvajana Sramika Rythu Congress Party
9
0
9
Independent
3
0
3
Total
543
0
543


Wednesday, May 7, 2014

पाकिस्तान में बढ़ा पोलियो का मामला


पाकिस्तान में बढ़ते पोलियो के मामले को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में पाकिस्तान पर कड़े यात्रा प्रतिबंध लगाए जाने की वकालत की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि पोलियो का प्रसार एक अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य समस्या है और इसके दूसरे देशों में भी फैलने का खतरा है...


विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र संघ का एक अंग, ने इस दिशा में एक कड़े दिशा -निर्देश भी जारी किए हैं... जिसके तहत पाकिस्तान से बाहर यात्रा कर रहे पाकिस्तानियों को एक ख़ास पोलियो वैक्सिनेशन सर्टिफिकेट दिखाना होगा....

पाकिस्तान का पड़ोसी होने के नाते भारत को भी इस दिशा में कुछ कड़ा कदम उठान होगा... और कड़ाई से उनका पालन भी करवाना होगा... पाकिस्तान में पोलियो के बढ़ते मामले को देखते हुए इसी साल पोलियो मुक्त देश का तमगा पाए भारत के लिए भी खतरा बढ़ जाता है..

पाकिस्तान के अलावे, डब्ल्यूएचओ ने, इसी तरह के दिशा-निर्देश दो और देशों सिरिया और कैमरुन के लिए भी जारी किए हैं...। इन देशों में पहले पोलियो को जड़ से मिटा दिया गया था... लेकिन हाल ही में पता चला है कि इन देशों से पोलियो की बीमारी दूसरे देशों में भी फैल रही है । पाकिस्तान की गिनती ऐसे तीन देशों में होती है जहां पोलियो की बीमारी अब भी कायम है..। दो अन्य देश हैं.... नाईजीरिया और अफगानिस्तान ...

अपनी हाल की घोषणा में डब्ल्यूएचओ ने एशिया और अफ्रिका में पोलियो फैलने की घटना को असामान्य हालात बताया है कहा है कि हालात से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर का समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है...

Thursday, March 27, 2014

बिहार की राजनीति में पतन की ओर नीतीश काल


 नोट : लिखने के बाद दुबारा पढ़ने का मौका नहीं मिला और बिना दुबारा पढ़े भी अपलोड करने का लोभ नहीं त्याग पाया।

बिहार की सत्ताधारी पार्टी जेडीयू और इसके नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बहुत तेजी से कमजोर होते नजर आ रहे हैं। यह मामला सिर्फ बीजेपी का साथ छोड़ने, शरद यादव से नीतीश की अनबन और जेडीयू नेताओं के पार्टी छोड़ने भर तक सीमित नहीं है। असली बात है नीतीश के साथ जाति का अभाव होना, जिसकी कमी उन्हें इस चुनाव में महसूस हो सकती है।

2005 से बिहार की राजनीति को नीतीश कुमार अपनी उंगलियों पर नचाते रहे हैं। लालू-राबड़ी के सत्ता से बाहर होने के बाद जिस तरह से नीतीश नें लालू को पटना में उनके घर से बेदखल किया था...पिछले आठ वर्षों में नीतीश ने अपनी पार्टी के कई नेताओं जैसे- कुशवाहा, ललन सिंह, को भी उसी तरह से बेदखल कर दिया।

वर्षों तक नीतीश के साथ मिल, लालू विरोध की राजनीति करने वाले जो भी नेता, मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश के पैदा हुए अहं के सामने नहीं टिक पाए, उन्हें जेडीयू से चलता कर दिया गया। लालू की पार्टी से लोगों का आयात होता रहा और समता पार्टी के मूल नेता एक-एक कर अपनी उपादेयता खोते चले गये। यहां तक कि पार्टी अध्यक्ष शरद यादव को भी हाशिए पर पहुंचा दिया।

इस दौरान नीतीश ने सिर्फ जेडीयू के नेताओं को ही नहीं हड़काया, बल्कि बिहार बीजेपी को भी अपनी धौंस में रखा। बीजेपी की केन्द्र में शासन करने के लिए जेडीयू के समर्थन की लालसा कहें या नीतीश की सेटिंग करने की क्षमता, बिहार बीजेपी और बीजेपी के केन्द्रीय नेता भी नीतीश के सामने उनकी भाषा ही बोलते थे।

बिहार की राजनीति हमेशा से जाति के ईर्द-गिर्द घुमती है। और नीतीश के पास जाति का अभाव है। कुर्मी जाति के नीतीश कुमार को कुर्मी वोट शायद ही वो पहचान दिला पाता, जो आज है। लालू विरोध की लड़ाई और बीजेपी के साथ होने से नीतीश दूसरी जातियों में भी ग्राह्य हो गये, और एक राष्ट्रीय पहचान पा गये।

सत्ता में आने के कुछ वर्षों बाद नीतीश कुमार को अचानक इस बात का एहसास हुआ कि लालू का मुद्दा खत्म होने के साथ ही लालू विरोध का वोट बैंक दूसरी ओर जाने के लिए आजाद हो गया। तब उन्होने महादलित कार्ड खेला और साथ ही लालू के साथ रहे मुस्लिम वोट को अपने साथ लाने का मुहिम शुरु किया।

इसी दौरान रामविलास पासवान ने उनपर दलितों को विभाजित करने के आरोप भी लगाये। रही बात मुस्लिम वोट की..तो इसके लिए नीतीश को 2002 के गुजरात दंगें के केन्द्र बना दिए गये नरेन्द्र मोदी के विरोध से आसान रास्ता नजर नहीं आया। नीतीश ने नरेन्द्र मोदी कार्ड चलना शुरु कर दिया। मोदी के साथ कई बार गलबहियां कर चुके और बीजेपी के समर्थने से सरकार चला रहे नीतीश के लिए मोदी अचानक अछूत बन गये।

दरअसल, नीतीश की यही राजनीतिक चूक थी, जिसने उन्हें मुख्यमंत्री रहते हुए भी अप्रासंगिक बनाना शुरु कर दिया। बीजेपी के साथ विधानसभा में अपार बहुमत से शासन कर रहे, नीतीश की सरकार बीजेपी से अलग होकर अचानक निर्दलीय और दूसरों की वैशाखी पर आ गई। और नीतीश जब कमजोर पड़े, तो वो तमाम नेता जो सरकार की मजूबती (जो बीजेपी के समर्थने से थी), की वजह से जुबान बंद रखे थे, अचानक खुद को नीतीश से आजाद महसूस करने लगे।

जेडीयू में मची भगदड़, सामान्य चुनावी भगदड़ भर नहीं है। यह नीतीश के साथ होने से भविष्य डूबने की डर से पैदा हुई भगदड़ है। मोदी बनाम मोदी विरोध में बंटी राजनीति में नीतीश को कौन वोट देगा, यह चिंदा अब जेडीयू के नेताओं को सताने लगा है। बिहार में बीजेपी के विरोध में कौन होगा, यह अब तक तय नहीं है..और हाल तक साथ-साथ चले जेडीयू को यह जगह मिलेगा इसका शक पार्टी नेताओं को भी है।

बिहार की राजनीति अभी तीन हिस्सों में बंटी है- बीजेपी-लोजपा, आरजेडी-कांग्रेस और जेडीयू। सर्वे के मुताबिक प्रदेश में बीजेपी सबसे आगे चल रही है, यादव-मुस्लिम गठजोड़ के बुते 15 वर्षों तक शासन करने वाले लालू यदि कांग्रेस के समर्थन से यादव के साथ मुस्लिम वोट बरकरार रखने में सफल होते हैं तो नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू के लिए आगे का रास्ता मुश्किलों से भर जाएगा। 

Thursday, January 2, 2014

अंटार्कटिका पर फंसे जहाज में एक भारतवंशी भी



अंटार्कटिका पर दस फीट मोटी बर्फ में फंसे जहाज एमवी एकेडेमिक शोकालस्की पर एक भारतीय मूल के पत्रकार आलोक झा भी हैं। उनके साथ जहाज पर 73 और लोग फंसे हुए हैं।
गार्डियन के पत्रकार आलोक झा

आलोक ब्रिटिश अखबार गार्डियन के विज्ञान संवाददाता है। लंदन के इंपिरियल कॉलेज से फिजिक्स में स्नातक, आलोक साइंस विकली पॉडकास्ट भी प्रस्तुत करते हैं। वे गार्डिन के साथ 2003 से जुड़े हुए हैं जब इस पेपर ने अपना साइंस सप्लिमेंट 'लाईफ' निकालना शुरु किया। उन्होने कुछ किताबें भी लिखी हैं। 
 
फंसे जहाज से बर्फ को निहारता एक व्यक्ति
अपने ट्विटर अकाउंट @alokjha से वे लगातार जहाज के रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में लेटेस्ट जानकारी दे रहे हैं। पिछले सात दिनो से फंसे इस जहाज को निकालने के सार प्रयास अब तक असफल हो चुके हैं। और अब लोगों को हैलिकॉप्टर से रेस्क्यू करने का प्रयास किया जा रहा है।