Saturday, June 6, 2015
Monday, June 1, 2015
संजय के द्वारा धृतराष्ट्र को बिहार की राजनीति का आंखों देखा हाल सुनाना (1)
गतांक
से आगे....
धृतराष्ट्र:
संजय, जनता
परिवार का तूफान तो ठंडा पड़
गया। अब क्या होगा लालू और
नीतीश का?
संजय:
महाराज,
यूं तो राजनीति
कहीं की हो, कभी
भी, किसी
भी वक्त कोई भी करवट ले सकती
है। बिहार की राजनीति तो यूं
भी खास है। मैं अपनी दिव्य
आंखों से जो देख रहा हूं वह ये
है कि नीतीश लालू से इतर अपना
भविष्य तलाशने में लग गये हैं।
हालांकि
आरएसएस ने भाजपा को नीतीश से
पींगें बढ़ाने को कहा था। और
फिर भाजपा नेताओं ने अपनी
कोशिशें भी तेज कर दीं। लेकिन
नीतीश बहुत इच्छुक नजर नहीं
आ रहे हैं। शायद और गलतियां
करने से बचने की पुरजोर कोशिश
कर रहे हैं नीतीश कुमार।
धृतराष्ट्र:
यह बताओ संजय कि
नीतीश की राजनीति कौन सी करवट
ले रही है। नीतीश किस के साथ
जा रहे हैं?
संजय:
महाराज,
नीतीश कांग्रेस
के साथ जाते नजर आ रहे हैं।
धृतराष्ट्र:
यह तुम क्या कह रहे
हो संजय? यह
सच है??? तो
फिर लालू और कांग्रेस की लंबी
दोस्ती का क्या होगा?
संजय:
सम्राट,
कांग्रेस इतिहास
के सबसे कठिन दौर में है। खोने
के लिए अब कुछ बचा नहीं है।
इसलिए कुछ पाने की कोशिश में
वह लालू से पल्लू छुड़ाने की
कोशिश में कांग्रेस लगी है।
धृतराष्ट्र:
यह क्या हो रहा है
संजय?
संजय:
जी हां महाराज।
कांग्रेस में सोनिया का दौर
अब अवसान की ओर है। राहुल गांधी
पार्टी को अब अपने तरीके से
चलाना चाह रहे हैं। सोनिया
के मित्र अब उनके लिए कोई मायने
नहीं रखते । मनमोहन सरकार
के जिस अध्यादेश को राहुल
गांधी ने मीडिया के सामने
गुस्से में फाड़ा था उस अध्यादेश
से सबसे पहले फायदा कांग्रेस
के एक नेता और आरजेडी प्रमुख
लालू प्रसाद को ही होना था।
उसी समय यह तय हो गया था कि
कांग्रेस के साथ लालू के दिन
गिने हुए बचे हैं। लेकिन लालू
फिर भी सांप्रदायिकता के नाम
पर कांग्रेस को अपने साथ बनाने
की कोशिश करते रहे।
लोकसभा
चुनाव में बीजेपी की जबरदस्त
जीत ने सांप्रदायिकता और
धर्मनिर्पेक्षता के शोर को
थोड़ा सा ठंडा कर दिया है।
लालू के अलावे यूं भी बिहार
में मुसलमानों के वोट पर नीतीश
कुमार जबरदस्त तरीके से दावे
ठोंक रहे हैं।
धृतराष्ट्र:
तो क्या कांग्रेस
लालू के माय समीकरण के बगैर
चुनावी मैदान में उतरने की
तैयारी कर रही है।
संजय:
महाराज,
बिहार की राजनीति
में इन दिनों बहुत परिवर्तन
आया है। लालू का माय समीकरण
अक्षुण्ण है या नहीं यह तो
चुनाव के बाद ही पता चल पाएगा,
यह जरूर है कि नीतीश
के विकास और धर्मनिरपेक्षता
की राजनीति का फायदा उठाने
की कोशिश में कांग्रेस लग गई
है।
क्रमश:.......
Monday, May 25, 2015
संजय के द्वारा धृतराष्ट्र को बिहार की राजनीति का आंखों देखा हाल सुनाना
धृतराष्ट्र:
कहो संजय बिहार की
राजनीति में क्या चल रहा है
इन दिनों, तुम
क्या देख पा रहे हो अपनी आंखों
से???
संजय:
महाराज,
सबकुछ वैसा ही हो
रहा है जैसा हमलोगों ने पहले
सोच रखा था। लोगों को जनता
परिवार का जो तूफान आता दिख
रहा था वह कमजोर सा पड़ गया
है। गांधी मैदान तक भी नहीं
पहुंच सका। एक बिल्डिंग पर
बबंडर बना कर प्रदेश से उड़
चला है। जनता परिवाक नाम का
तूफान। लोग अभी तक सहमे हुए
हैं कि तूफान कहर बरपाएगा।
लेकिन उन्हें नहीं पता कि
तूफान खत्म हो चुका है। लोगों
को यह समझने में कुछ वक्त लगेगा।
धृतराष्ट्र:
साफ-साफ
कहो धृतराष्ट्र!!!
क्या महाविलय नहीं
हो रहा है, क्या
लालू-नीतिश
नहीं मिल रहे हैं।
संजय:
महाराज इन्हें तो
कभी नहीं मिलना था। दरअसल मोदी
की सरकार आने से इन्हें बहुत
तेज झटका लगा था। झटका लगा तो
हिलने लगे..।
हिलते-हिलते
दोनों नजदीक आ गए। अचानक इन्हें
खयाल आया कि जब हम हिल रहे हैं
तो और जोर से क्यों ना हिलें
ताकि लोगों को लगे कि इनके
हिलने से तूफान आ रहा है और
फिर लोग कुच दिनों तक तूफान
के मुगालते में रहे। बस यही
कहानी है महाराज जनता परिवार
और लालू-नीतिश
की।
क्रमश:.......
Tuesday, May 19, 2015
Speech of Hukmdev Narayan Yadav on General Budget 2015-16
16.03.2015
आम बजट 20015-16 पर संसद में भाषण देते हुए मधुबनी के सांसद हुक्मदेव नारायण यादव।
Chal Chal Mere Saathi in Korea
Korean Children perform at Dinner Banquet in honour of Prime Minister Narendra Modi
Sunday, May 10, 2015
शराब पीकर गाड़ी चला, फुटपाथ पर 'कुत्तों' को कुचल; जमानत तो अधिकार है
- घटना और तिथि: 28 दिसंबर 2002, रात के 2 बजे फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कुचला गया
- फैसले में लगा समय 13 साल
- अंतरिम बेल मिलने में लगा समय: 3 घंटे
- नियमित बेल मिलने में लग समय: 2 दिन
![]() |
| कलर्स के एक प्रोग्राम में सलमान खान |
सलमान
खान एक सुपरस्टार हैं। सच
बताउं तो मैं खुद उनका बहुत
बड़ा फैन हूं। यह जानते हुए
कि उनकी अभिनय क्षमता औसत से
थोड़ी कम ही है।
प्रत्येक
स्टार की एक फैन फौलौइंग होती
है। फैन अपने स्टार को परेशानी
में नहीं देख सकते। उसे परेशान
देखकर दुखी हो उठते हैं। बहुत
सारे लोग तो अपने स्टार के लिए
जीने मरने की बात भी करते हैं।
कई तो जान दे भी देते हैं।
सलमान
खान की फैन फौलौइंग बहुत बड़ी
है। उनके फैन्स की संख्या में
उनका भी नाम है जो उस काली राती
में सलमान की गाड़ी के नीचे
आए थे।
जिन्हें
जाना था वे चले गए। तमाम कष्टों
को झेलने के बाद घरवालों को
उनके बिना जीने की आदत भी पड़
गई। जो जिंदा हैं हालात से
समझौता कर चुके हैं। सलमान
की कथित दरियादिली (Being Human)
चैरिटि की खबरें देख-देख
कर उनके घाव भर चुके हैं। अब
वे भी सलमान के लिेए सजा नहीं
चाहते।
उन्हें
यह महसूस हो रहा है कि अगर सलमान
जेल भी चले जाएं तो उनका कुछ
भला नहीं होने वाला (उल्टा
स्टार के जेल चले जाने से और
दुखी हो जाएंगे)।
इसलिए सलमान के लिए वे भी अब
सजा नहीं चाहते। जो होना था
वो तो हो चुका अब तो बस ये चाहते
हैं कि इस पैसे वाले स्टार से
दो-चार पैसे और मिल
जाएं तो परिवार का कुछ भला हो
जाए।
![]() |
| दोस्तों के साथ पार्टी बनाते सलमान खान की एक तस्वीर |
अब
बात जरा उन लोगों की जो चाहते
हैं कि सलमान को कड़ी से कड़ी
सजा मिले। हत्या हुई है,
भले ही अनजाने में।
वैसे भी अगर गैलन भर दारू डकार
कर गाड़ी चला रहे हों और फुटपाथ
पर सोने वालों को कुचल दें तो
इसे तो गैरइरादन हत्या मानना
भी नहीं चाहिए।
हाइवे
से शराब की दुकाने हटाने की
लड़ाई चल रही है। देश भर में
शराब पीकर गाड़ी चलाने के
खिलाफ अभियान जोरों पर है।
जिस फैसले को आप इस अभियान के
लिए एक नजीर बना सकते थे..।
उसी फैसले से आपने अभियान की
हवा निकाल दी। सलमान को बेल
मिलने की रात में फुटपाथ पर
सोए लोग जरूर बहुत घबराए होंगे।
क्या पता रात में फिर से कोई
स्टार शराब पीकर गैर इरादतन
हत्या कर दे।
हां
पता है, सलमान को
सिर्फ बेल मिली है। सजा मुक्ति
नहीं। लेकिन एक की हत्या हुई
है। गैर इरादतन ही सही। और
दोषी साबित होने के बाद भी जेल
नहीं गया।
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