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Tuesday, May 27, 2014

इतना लोहा कहां से लाता है गुजरात ???

जब भी मैं गुजरात की तरफ देखता हूं तो यही सोचता हूं कि यह राज्य इतना "लोहा" कहां से लाता है ??? चौंक गये!! गुजरात और लोहा!!! इनमे क्या सम्बन्ध है????

मैं आपको बताता हूं...। जब भी आप गुजरात की चर्चा करते हैं... गुजरातियों की चर्चा करते हैं तो आपके ज़हन में क्या आता है…???? चलिए मैं आपको बताता हूं कि मेरे ज़हन में क्या आता है!!!

शांतिप्रिय लोग, भाषा में छे-छू का अधिक प्रयोग, चुपचाप शांति से व्यापार करनेवाले लोग, हिंसा, अपराध से दूर रहनवाले लोग, हमेशा कानून का पालन करने वाले, और अंत में अपने काम से मतलब रखनेवाले लोग..। यानि कुल मिलाकर कहें.. तो 'ना काहू से दोस्ती ना काहू से वैर' के सिद्धांत पर चलनेवाले लोग…।

लेकिन जब इस समाज या राज्य को देखने से पता चलता है कि आराम की जिंदगी छोड़, देश-समाज की भलाई के लिए दूसरों से बैर लेने वाले, सबसे मजबूत लोग इसी समाज से हुए..

वो फकीर गुजरात का ही था... जो बिना हथियार उठाये अंग्रेजों से टकराता रहा। और जब अपने भटकते दिखे तो उनसे भी किनारा करने में उसे वक्त नहीं लगा। महात्मा गांधी उस वैचारिक दृढ़ता के प्रतीक थे जिसने असंभव को भी संभव बनाना सिखाया। लौह इरादे के बापू ने पूरे देश को अंग्रेजी सत्ता के सामने ला खड़ा किया जिससे देश आजाद हुआ...

सरदार बल्लभ भाई पटेल ऐसे थे कि लौह पुरुष ही कहे जाने लगे...। एक तरफ गांधी-नेहरु दूसरी तरफ उनसे पूरी विनम्रता के साथ सैद्धांतिक टकराव लेते गुजराती सरदार बल्लभ भाई पटेल..। अपने लिए कुछ मुनाफे की ख्वाहिश नहीं, सिर्फ देश के लिए...। शायद ये न होते तो भारत कई और देशों में बंटा होता और ये कुछ और साल जिंदा होते तो इस देश के नक्शे में कुछ और हिस्से जुड़े होते...

मोरारजी देसाई आजाद भारत में बनी पहली ग़ैर कांग्रेसी सरकार के प्रधानमंत्री थे। अभी की पीढी भले ही मोरारजी भाई के बार में अनजान हो लेकिन जो उस दौर के गवाह रहे हैं कि वे जानते हैं कि मोरारजी भाई किस तरह लौह व्यक्तित्व सख्सियत थे। उन्हें भारत रत्न के साथ ही पाकिस्तान के सबसे बड़े नागरिक सम्मान निशान-- पाकिस्तान से भी सम्मानित किया गया था। 
 
और अब बात नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की..।  बीजेपी का एक छोटा सा नेता दिल्ली में बैठा है.. वहीं उसे गुजरात जाने का हुक्म सुनाया जाता है...। गुजरात का सीएम बनता है...। और फिर शुरु होता है उसके जीवन का सबसे कठिन दौर। पहले राज्य का भूकंप से तबाह होना। और फिर इससे उबरने के ठीक बाद सबसे भयानक हिंदू-मुस्लिम दंगा। दंगा ऐसा, जो उसे अपने घर में भी बेगाना बना देता है...। राजनीतिक रुप से अछूत बन जाता है वह व्यक्ति...। छूआछूत विरोधी कानून नहीं होता तो शायत वह सामाजिक रुप से भी अछूत घोषित कर दिया जाता। लेकिन लौह निश्चय, लौह आत्म विश्वास से भरा यह शख्स दशक भर से अधिक समय तक खुद को स्थापित बनाए रखने की लड़ाई लड़ता रहा। समय हर घाव को भर देता है लेकिन उसकी नीयति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा था...। लोग अपने फायद के लिए उसके नाम के साथ एक से एक उपमा जोड़ रहे थे.. मौत के सौदागर से आगे न जाने क्या क्या!!! कुछ लोग तो राष्ट्रीय संप्रभुता के मुद्दे को नकारते हुए इस शख्श के खिलाफ दूसरे देशों को भी चिट्टी लिख रहे था..

 कोई और होता तो टूट जाता, बिखर जाता लेकिन इस शख्श ने झुकना तो सीखा ही नही था..। लड़ना और जीतना यही तो पहचान है नरेन्द्र मोदी की। जनता यह सब देख रही थी.. देख ही नहीं रही थी, समझ भी रही थी..। और इस लौह दृढ़ता वाले पुरुष को आंक रही थी, उसका मुल्यांकन कर रही थी। और एक दिन एक झटके में उसे सवा अरब आबादी वाले देश में सत्ता के शीर्ष पर पहुंचा दिया।

देश में एक से एक नेता हुए हैं... लेकिन गुजरात के जिन महापुरुषों (नरेन्द्र भाई का प्रधानमंत्री काल अच्छा रहा तो इतिहास उन्हें महापुरुष के रुप में ही याद करेगा) की मैने चर्चा की है वो अपने काल के सर्वश्रेष्ठ रहे हैं...। आप समझ गये होंगे कि मेरा प्रश्न वाजिह है कि गुजरात इतना लोहा कहां से लाता है जिनसे ऐसे लौह पुरुष तैयार होते हैं..



Wednesday, May 21, 2014

लोकसभा में परिवारवाद का बोलबाला


आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी के चचेरे भाई अविनाश रेड्डी कडपा से चुने गये, जबकि जगन के ही मौसा (मां की छोटी बहन के पति) सुब्बा रेड्डी ओंगोल से लोकसभा पहुंचने में सफल रहे हैं। जगन मोहन के परिवार के छह से अधिक सदस्य लोकसभा और विधानसभा के लिए चुनावी मैदान में थे। जगन की मां भी विशाखापत्तनम से लोकसभा पहुंचना चाहती थीं लेकिन जनता ने नो इंट्री लगा दिया।

वहीं नवगठित राज्य तेलंगाना की सबसे मजबूत पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति को चलाने वाले के. चन्द्रशेखर राव (केसीआर) के परिवार के भी कई सदस्यों ने विधानसभा और लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा। पार्टी प्रमुख खुद मेडक से लोकसभा के लिए चुने गये जबकि उनकी बेटी कविता निजामाबाद से संसद पहुंचने में सफल रही। यानि पिता-पुत्री की जोड़ी लोकसभा पहुंचने में सफल रही। केसीआर विधानसभा के लिए भी चुने गये हैं। लेकिन वे लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे क्योंकि जनता ने उन्हें तेलंगाना पर शासन करने का मौका भी दिया है। 
 
असम में एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल ढुबरी और उनके छोटे भाई सिराजउद्दीन अजमल बारपेटा सीट से लोकसभा के लिए चुने गये हैं।

बिहार में लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान हाजीपुर से, उनके पुत्र चिराग पासवान जमुई से और भाई रामचन्द्र पासवान समस्तीपुर से जीतने में सफल रहे हैं। बीजेपी के साथ गठबंधन में इन्हें सात सीटें मिली थी, जिसमें से तीन सीटों पर परिवार के सदस्यों ने ही चुनाव लड़ा और तीनो जीतने में सफल रहे। यानि इस परिवार के तीन सदस्य लोकसभा में एक साथ दिखेंगे।

बिहार से ही पति-पत्नि भी लोकसभा में एक साथ पहुंचने में कामयाब हो गये हैं। लालू की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर मधेपुरा से पप्पू यादव लोकसभा के लिए चुने गए हैं जबकि उनकी पत्नी रंजीता रंजन कांग्रेस टिकट पर सुपौल से चुनाव जीतने में सफल हो गई हैं..। पप्पू यादव, जिनकी पहचान एक दबंग की है.. मधेपूरा से जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव को पटकनी देने में सफल रहे।

वहीं यूपी की बात करें तो मुलायम का परिवार हमेशा से राजनीति में छाया रहा है। इस बार भी समजावादी पार्टी की पांच सीटों में से सभी सीटें परिवार के पास ही है। मुलायम सिंह यादव खुद दो क्षेत्रों--मैनपुरी व आजमगढ़ से जीते हैं जबकि उनकी बहु और मुख्यमंत्री अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से सफल हुई हैं। मुलायम के छोटे भाई राम गोपाल के पुत्र अक्षय यादव फिरोजाबाद से लोकसभा का चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। यानी एक ही परिवार से ससुर, बहु और चाचा-भतीजा एक साथ संसद में कानून बनाने बैठेंगे..। मुलायम के ही एक और भतीजा धर्मेन्द्र यादव बदायूं से लोकसभा के लिए चुने गये हैं।

कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी ऐसे ही परिवार में शामिल हैं। वहीं बीजेपी के टिकट पर मेनका गांधी और उनके पुत्र वरुण गांधी भी लोकसभा में होंगे।

यानि इस बार बड़ी संख्या में कई परिवारों के एक से अधिक सदस्य लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं..। यह हालत तब है जबकि जनता ने बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को नकारा भी है। बिहार में जनता ने लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी और पुत्री मीसा भारती को नकार दिया.. राबड़ी सारण से लोकसभा के मैदान में थीं जबकि उनकी बेटी मीसा भारती पाटलीपुत्र से। 

इनके अलावे भी देश में कई ऐसे राजनीतिक परिवार हैं जिनके सदस्य विधानसभा से लेकर लोकसभा तक में पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए ममता बनर्जी जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं वहीं उनका भतीजा अभिषेक मुखर्जी भी इस बार डाइमंड हार्बर लोकसभा सीट से संसद पहुंचने में सफल हो गये। वहीं राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के पुत्र अभिजीत मुखर्जी दूसरी बार भी बंगाल के जांगीपुर लोकसभा सीट जीतने में कामयाब रहे।





Sunday, May 18, 2014

30 देशों के 140 डेलिगेट्स भारत के चुनावी प्रक्रिया से अवगत हुए

दो महीने से भी अधिक समय तक चले भारतीय आम चुनाव को देखने-समझने के लिए दुनिया भर के 30 देशों से 140 डेलिगेट्स भारत आए थे...
इन लोगों ने अलग-अलग राज्यों में जाकर चुनावी प्रक्रिया को देखा और समझा कि किस तरह से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सफलतापूर्वक चुनाव का संचालन किया जाता है..
2014 लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय चुनाव आयोग ने एक इलेक्शन विजिटर्स प्रोग्राम चलाया   जिसके तहत दूसरे देशों के लोगों को भारतीय चुनावी प्रक्रिया से रुबरु होने का मौका मिला।
नाम्बिया, नाइजिरिया, लेसेथो, मलेशिया, मारिशस, म्यान्मार, नेपाल, केन्या, मिस्र, सउदी अरब, इराक, ओमन आदि देशों से आए डेलिगेट्स ने देश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया।  
इन डेलिगेट्स को पहले अलग अलग समूहो में बांटा गया फिर प्रत्येक समूह को चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया से अवगत कराया। फिर उन लोगों को चुनाव क्षेत्रों के दौरे पर ले जाया गया। कर्नाटक, यूपी, बंगालहिमाचल और दिल्ली के दौरे पर जाकर इन लोगों ने चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कार्य प्रणाली का सूक्ष्मता से अध्ययन किया। 
इस दौरान डेलिगेट्स चुनावी प्रक्रिया, इसमें तकनीक का प्रयोग और चुनाव आयोग की कार्य-प्रणाली से बहुत प्रभावित हुए..

Saturday, May 17, 2014








बिहार में लोकसभा चुनाव के नतीजे
Party
Won
Leading
Total
Bharatiya Janata Party
22
0
22
Indian National Congress
2
0
2
Nationalist Congress Party
1
0
1
Janata Dal (United)
2
0
2
Lok Jan Shakti Party
6
0
6
Rashtriya Janata Dal
4
0
4
Rashtriya Lok Samta Party
3
0
3
Total
40
0
40

नीतीश के अच्छे दिन चले गए!

अब क्या करुं?

लोकसभा चुनाव के नतीजे


                                      लोकसभा चुनाव के नतीजे

ALL INDIA Result Status
Status Known For 543 out of 543 Constituencies
Party
Won
Leading
Total
Bharatiya Janata Party
282
0
282
Communist Party of India
1
0
1
Communist Party of India (Marxist)
9
0
9
Indian National Congress
44
0
44
Nationalist Congress Party
6
0
6
Aam Aadmi Party
4
0
4
All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam
37
0
37
All India N.R. Congress
1
0
1
All India Trinamool Congress
34
0
34
All India United Democratic Front
3
0
3
Biju Janata Dal
20
0
20
Indian National Lok Dal
2
0
2
Indian Union Muslim League
2
0
2
Jammu & Kashmir Peoples Democratic Party
3
0
3
Janata Dal (Secular)
2
0
2
Janata Dal (United)
2
0
2
Jharkhand Mukti Morcha
2
0
2
Kerala Congress (M)
1
0
1
Lok Jan Shakti Party
6
0
6
Naga Peoples Front
1
0
1
National Peoples Party
1
0
1
Pattali Makkal Katchi
1
0
1
Rashtriya Janata Dal
4
0
4
Revolutionary Socialist Party
1
0
1
Samajwadi Party
5
0
5
Shiromani Akali Dal
4
0
4
Shivsena
18
0
18
Sikkim Democratic Front
1
0
1
Telangana Rashtra Samithi
11
0
11
Telugu Desam
9
7
16
All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen
1
0
1
Apna Dal
2
0
2
Rashtriya Lok Samta Party
3
0
3
Swabhimani Paksha
1
0
1
Yuvajana Sramika Rythu Congress Party
9
0
9
Independent
3
0
3
Total
543
0
543