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Thursday, December 24, 2015

बनाया है मैं ने ये घर धीरे-धीरे


                                                                                                                        रामदरश मिश्र

बनाया है मैं ने ये घर धीरे-धीरे,
खुले मेरे ख़्वाबों के पर धीरे-धीरे।

किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला,
कटा ज़िंदगी का सफ़र धीरे-धीरे।

जहां आप पहुंचे छलांगें  लगा कर
वहां मैं भी पहुंचा  मगर धीरे-धीरे।

पहाड़ों की कोई चुनौती नहीं थी,
उठाता गया यूँ ही सर धीरे-धीरे।

न हँस कर न रो कर किसी में उडे़ला,
पिया खुद ही अपना ज़हर धीरे-धीरे।

गिरा मैं कहीं तो अकेले में रोया,
गया दर्द से घाव भर धीरे-धीरे।

ज़मीं खेत की साथ ले कर चला था,
उगा उस में कोई शहर धीरे-धीरे।

मिला क्या न मुझ को ए दुनिया तुम्हारी,
मोहब्बत मिली, मगर धीरे-धीरे।

Friday, November 13, 2015

समझदारी की ठेकेदारी बंद कर भाई...

 

नीतीश ने बिहार को कहां से कहां पहुंचाया है, यह बिहार को जानने वाला कोई भी व्यक्ति भली-भांति जानता है।  भाजपा से मिले फ्रि-हैंड की बदौलत नीतीश गुंडा पर लगाम लगाते हुए आधारभूंत ढ़ांचों के विकास के कार्यों में लगे रहे।

भाजपा के समर्थक, कार्यकर्ता और यहां तक की नेता भी नीतीश सरकार के दौरान हुए कार्यों को नकारते नहीं। निजी बातचीत में सभी नीतीश के परफॉर्मेंश की तारीफ ही करते रहे हैं।

समस्या तब शुरू हुई जब नीतीश का झुकाव 'कांग्रेसी धर्मनिर्पेक्षतावाद' की ओर बढ़ने लगा। उनके सलाहकार उन्हें बीजेपी और विशेषकर मोदी के खिलाफ भड़काने लगे। नतीजा सबके सामने था। अच्छी खासी चलती सरकार की स्थिति डंवाडोल हो गई।

बिहार दस वर्षों बाद पहली बार राजनैतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। नीतीश के अंत की काहनियां गढ़ी जाने लगी।  लोकसभा चुनाव ने नीतीश को मानो अर्स से फर्स पर ला पटका।

इस तमाम मामलों के बीच  ध्यान देने वाली बात यह थी कि नीतीश पर किसी वर्ग से यह आरोप नहीं लगा कि उन्होंने विकास नहीं किया।

और इसी का नतीजा था कि जब 2015 के प्रचार अभियान के दौरान एंटी इनकंबेंसी की कोई चर्चा नहीं हुई। राजनैतिक पंडितों के बीच यह जुमला बहुत लोकप्रिय रहा है।

सरकार बन गई। मतों का ध्रुवीकरण जैसा कि दावा किया जा रहा है बिल्कुल जातिवाद के आधार पर हुआ। फरवॉर्ड ने बीजेपी को वोट किया और पिछड़ी जातियों ने नीतीश-लालू गठबंधन को।

जो लोग नीतीश लालू को पसंद नहीं करते वे इस नतीजों को कुछ इस तरह से प्रचारित कर रहे हैं जैसे कि बिहार में भूकंप आ गया हो। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि सरकार का नेतृत्व नीतीश के हाथ में रहेगा जिनकी छवि एक कार्य करनेवाले नेता की है।

सोशल मीडिया में बिहार का बनाया जा रहा मजाक
उन्हें विरोध करना है सो करना है। इस चक्कर में नुकसान वो बिहार का कर रहे हैं। कोई बिहार को कोस रहा है कोई नीतीश को वोट देने वालों को कोस रहा है।
 
मेरा उनसे सीधा आग्रह है की समझदारी की ठेकेदारी बंद करो। जनता की चूनी हुई सरकार है यह। तुम्हारी नहीं चलेगी इसका मतलब यह नहीं की जनादेश पर सवाल उठाओ। 
(जूतों की जगह पैरों मे ही होती है.. उसे सर पर कोई नहीं पहनता  सिवाय बिहार के) यह मैसेज ट्विटर पर पोस्ट किया है किसी Sanjay_Vis ने। इस तरह के कई मैजेस ट्विटर पर फैलाए जा रहे हैं।)




और भाइयों सुनो, बिहार की बागडोर तुम्हीं लोगों के पास 90 तक रही है। इतिहास के पन्नों को खंगालो, बाप-दादा से पूछो कि कितना रायता उन दिनों तुम लोगों ने फैलाया। इस बात को समझो, सरकार को काम करने दो। मीडिया में अपने बिहार को बदनाम नहीं करो। मोदी भक्ति के चक्कर में बिहार विद्रोही मत बन जाओ।  

Sunday, November 8, 2015

बिहार चुनाव: 2014 और 2015 के चुनावों में मतों का प्रतिशत

2014 के लोकसभा चुनाव और 2015 के विधानसभा चुनावों में मतों का प्रतिशत


2015 विधानसभा चुनाव
महागठबंधन                             मत प्रतिशत                     एनडीए दल                 मत प्रतिशत
JDU
16.8
BJP
24.5
RJD
18.4
LJP
4.8
INC
6.7
RLSP
2.6
Total
40.9
Total
31.9






                                                           2014 लोकसभा चुनाव

अभी महागठबंधन में
शामिल दल                                 मत प्रतिशत                   एनडीए दल                   मत प्रतिशत
JDU
16.4
BJP
29
RJD
20.46
LJP
6.5
INC
9
RLSP
3.5
Total
45.86
Total
38.9









Sunday, September 6, 2015

मिथिला-- रामधारी सिंह 'दिनकर'

मैं पतझड़ की कोयल उदास,
बिखरे वैभव की रानी हूँ
मैं हरी-भरी हिम-शैल-तटी
की विस्मृत स्वप्न-कहानी हूँ।

अपनी माँ की मैं वाम भृकुटि,
गरिमा की हूँ धूमिल छाया,
मैं विकल सांध्य रागिनी करुण,
मैं मुरझी सुषमा की माया।

मैं क्षीणप्रभा, मैं हत-आभा,
सम्प्रति, भिखारिणी मतवाली,
खँडहर में खोज रही अपने
उजड़े सुहाग की हूँ लाली।

मैं जनक कपिल की पुण्य-जननि,
मेरे पुत्रों का महा ज्ञान ।
मेरी सीता ने दिया विश्व
की रमणी को आदर्श-दान।

मैं वैशाली के आसपास
बैठी नित खँडहर में अजान,
सुनती हूँ साश्रु नयन अपने
लिच्छवि-वीरों के कीर्ति-गान।

नीरव निशि में गंडकी विमल
कर देती मेरे विकल प्राण,
मैं खड़ी तीर पर सुनती हूँ
विद्यापति-कवि के मधुर गान।

नीलम-घन गरज-गरज बरसें
रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम अथोर,
लहरें गाती हैं मधु-विहाग,
‘हे, हे सखि ! हमर दुखक न ओर ।’

चांदनी-बीच धन-खेतों में
हरियाली बन लहराती हूँ,
आती कुछ सुधि, पगली दौड़ो
मैं कपिलवस्तु को जाती हूँ।

बिखरी लट, आँसू छलक रहे,
मैं फिरती हूँ मारी-मारी ।
कण-कण में खोज रही अपनी
खोई अनन्त निधियाँ सारी।

मैं उजड़े उपवन की मालिन,
उठती मेरे हिय विषम हूख,
कोकिला नहीं, इस कुंज-बीच
रह-रह अतीत-सुधि रही कूक।

मैं पतझड़ की कोयल उदास,
बिखरे वैभव की रानी हूँ,
मैं हरी-भरी हिमशैल-तटी
की विस्मृत स्वप्न-कहानी हूँ।

Thursday, August 27, 2015

ये शहर बनेंगे स्मार्ट सिटीज


केंद्र सरकार ने इन शहरों को बतौर स्मार्ट सिटीज विकसित करने का निर्णय लिया है













Wednesday, August 12, 2015

बात तो निकली थी लेकिन बीच में ही रुक गई


बात यूं ही कुछ शुरू हुई थी। संसद में सपा सांसद नरेश अग्रवाल चिंता प्रकट कर रहे थे। सांसदों के इमेज की चिंता। कह रहे थे कि मीडिया में उनकी नकारात्म छवी बनाई जा रही है। मी़डिया के लोग खुद संसद की कैंटीन में सस्ती दरों में खाना खाते हैं फिर उन्हें सांसदों पर उंगली उठाने का क्या हक है।

इसका मतलब तो मुझे सिर्फ यह समझ आया कि जब तू भी नंगा है तो मूझे नंगा क्यों कह रहा है।


बात आगे बढ़ी तो उन नेताओं सांसदों  की चर्चाएं शुरू हो गईं जो विरोधियों के लिए तूम, तू और ना जाने क्या क्या प्रयोग करते हैं।

अब अगर यही भाषा कोई इनके लिए कह दे तो उन्हें इमेज की चिंता होने लगती है।

और फिर सेलिब्रिटिज की बातें भी आईं। सोशल मीडिया में सेलिब्रिटिज को इतनी गालियां क्यों पड़ती हैं। पत्रकार से लेकर मॉ़डल और अभिनेता तक। अरे भई तूम सांसद तो हो नहीं, मंत्री भी नहीं हो। तूम्हारे पास तो कोई विशेषाधिकार भी नहीं है। तो कुछ तो उन लोगों को कह लेने दो जिनके पास कोई माईक नहीं है। जिनकी बातें मीडिया नहीं दिखाता। जिनकी बातें संसद में नहीं होतीं, जिनकी बातें, लोगों तक नहीं पहुचती।

तुम तो अपनी उल्टी कर के निकल लेते हो, जिनके उपर उल्टियां करते हो उनकी तो थूक कम से कम बर्दाश्त करो। तूम क्या बोलते हो, क्या करते हो। यह अब बात किसी से छिपी है क्या।

बात आगे और भी है....

Friday, August 7, 2015

उजाले की चाह में अंधेरों की गुलामी

                                                                                                                                                                             'बहुत जान है......'


पता नहीं उम्र का क्या दौर था वो। दूरदर्शन पर जो भी कार्यक्रम आता हो, उसे देखना किसी भी दूसरे कामों से महत्वपूर्ण होता था। उन्हीं दिनों टीवी पर कालीचरण, खुदगर्ज और काला पत्थर के शत्रुघ्न सिन्हा से वास्ता पड़ा था। मामूली शक्ल का यह हीरो, चेहरे पर कटे के निशान के बाद भी इस मासूम के दिल पर गहरा असर छोड़ गया था। अमिताभ का सबसे बड़ा फैन खुद को मानता हूं यह जानते हुए कि मैं उस शख्स को बिल्कुल नहीं जानता। लेकिन आज जब तूलना करता हूं तो कालीचरण ना तो विजय दिनानाथ चौहान से छोटा लगा था और ना ही डॉन से।

एक दौर की समाप्ती

और जब निंद टूटी तो चारो तरफ अंधेरा था। शाम में ही नहीं, सुबह में भी। रात में ही नहीं दिन में भी। एक हाथ में रौशनी की किरण नजर आई थी... टोह लेते-लेते वहां पहुंचा तो धमाका..। अंधेरा और गहरा गया।

कुछ दिनों बाद...
अब ना तो कालीचरण के लिए वक्त है और ना ही दीनानाथ चौहान के लिए। दिमाग में पिताजी के शब्द सिर्फ इतने, कि बेटा पढ़ ले। कुछ बन जाओगे दो दिन संवर जाएगा। नहीं तो आंख के आंसू ... से पोछते रह जाओगे जिंदगी भर।

एक और दौर!

"बहुद जान है इस मुजफ्फरपुर में"। 'कालीचरण' को पहली बार पर्दे से इतर अपनी आंखों के सामने देखने का मौका मिला। भाषण के बीच प्रत्येक 30 सेकेंड पर अपने जैकेट को संवारता कालीचरण आंखों को भा नहीं रहा था। जब उसने कहा कि बहुत दम है इस शहर में तो तालियां तो बजीं लेकिन वह इस व्यक्ति के लिए नहीं सिर्फ उस किरदार के लिए जो अंधेरे से मुक्ति दिलाने का वादा कर रहा था।

और फिर एक दिन...

और फिर एक दिन अंधेरे से मुक्ति दिलाना का वादा करता ऱौशनी से नहाया हुआ वह शख्स खुद अंधेरे की गुलामी करने लगा। अंधेरे को वह अपना दोस्त बताने लगा। चारों तरफ घटाटोप अंधेरा। यह शख्स खुद रौशनी से चौंधियाया हुआ, अंधेरों की दुहाई देता नजर आया। तालियां बजने लगी। रौशनी में डूबा हुआ शख्स आंखें बंद कर खुद को अंधेरे का बादशाह समझने लगा। उजाले तो गुलाम थे ही, अंधेरे पर भी साम्राज्य कायम हो गया।

घटाटोप अंधेरा।

इसके आगे एक लंबे समय के बाद.....

Saturday, July 4, 2015

ग्रीस में वित्तीय संकट जारी है. यहाँ पढ़िए किस देश/संस्था का ग्रीस पर कितना क़र्ज़ है




   जर्मनी -                                        75.63 अरब डॉलर
   फ़्रांस -                                          48.57 अरब डॉलर
   इटली -                                        42.58 अरब डॉलर
   स्पेन -                                          27.72 अरब डॉलर
   आईएमएफ़ -                               23.73 अरब डॉलर
   ईसीबी (यूरोपियन सेन्ट्रल बैंक)-     20.07 अरब डॉलर
   नीदरलैंड्स -                                14.86 अरब डॉलर
   अमरीका -                                  12.53 अरब डॉलर
   ब्रिटेन -                                       11.98 अरब डॉलर
   बेल्जियम -                                   8.32 अरब डॉलर
   ऑस्ट्रिया -                                     6.54 अरब डॉलर
   फ़िनलैंड -                                    4.10 अरब डॉलर

Saturday, June 6, 2015

एक नेता और एक पत्रकार के बीच ट्विटर पर शालीन भाषा में हुई नोक-झोंक


सुधीर चौधरी : शीर्ष के चार समाचार चैनलों में से  एक ज़ी न्यूज़ के संपादक

कुमार विश्वास: दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के शीर्ष स्तर के नेता और सबसे महंगे कवि 

इन दोनों के बीच ट्विटर पर हुई "शालीन बातचीत" देखें.  उम्मीद है की आपको झटका नहीं लगेगा. हमारे जैसे ही हैं ये भी ...


Monday, June 1, 2015

संजय के द्वारा धृतराष्ट्र को बिहार की राजनीति का आंखों देखा हाल सुनाना (1)


गतांक से आगे....


धृतराष्ट्र: संजय, जनता परिवार का तूफान तो ठंडा पड़ गया। अब क्या होगा लालू और नीतीश का

संजय: महाराज, यूं तो राजनीति कहीं की हो, कभी भी, किसी भी वक्त कोई भी करवट ले सकती है। बिहार की राजनीति तो यूं भी खास है। मैं अपनी दिव्य आंखों से जो देख रहा हूं वह ये है कि नीतीश लालू से इतर अपना भविष्य तलाशने में लग गये हैं।

हालांकि आरएसएस ने भाजपा को नीतीश से पींगें बढ़ाने को कहा था। और फिर भाजपा नेताओं ने अपनी कोशिशें भी तेज कर दीं। लेकिन नीतीश बहुत इच्छुक नजर नहीं आ रहे हैं। शायद और गलतियां करने से बचने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं नीतीश कुमार।

धृतराष्ट्र: यह बताओ संजय कि नीतीश की राजनीति कौन सी करवट ले रही है। नीतीश किस के साथ जा रहे हैं?

संजय: महाराज, नीतीश कांग्रेस के साथ जाते नजर आ रहे हैं।

धृतराष्ट्र: यह तुम क्या कह रहे हो संजय? यह सच है??? तो फिर लालू और कांग्रेस की लंबी दोस्ती का क्या होगा?

संजय: सम्राट, कांग्रेस इतिहास के सबसे कठिन दौर में है। खोने के लिए अब कुछ बचा नहीं है। इसलिए कुछ पाने की कोशिश में वह लालू से पल्लू छुड़ाने की कोशिश में कांग्रेस लगी है।

धृतराष्ट्र: यह क्या हो रहा है संजय?

संजय: जी हां महाराज। कांग्रेस में सोनिया का दौर अब अवसान की ओर है। राहुल गांधी पार्टी को अब अपने तरीके से चलाना चाह रहे हैं। सोनिया के मित्र अब उनके लिए कोई मायने नहीं रखते । मनमोहन सरकार के जिस अध्यादेश को राहुल गांधी ने मीडिया के सामने गुस्से में फाड़ा था उस अध्यादेश से सबसे पहले फायदा कांग्रेस के एक नेता और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद को ही होना था। उसी समय यह तय हो गया था कि कांग्रेस के साथ लालू के दिन गिने हुए बचे हैं। लेकिन लालू फिर भी सांप्रदायिकता के नाम पर कांग्रेस को अपने साथ बनाने की कोशिश करते रहे।

लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जबरदस्त जीत ने सांप्रदायिकता और धर्मनिर्पेक्षता के शोर को थोड़ा सा ठंडा कर दिया है। लालू के अलावे यूं भी बिहार में मुसलमानों के वोट पर नीतीश कुमार जबरदस्त तरीके से दावे ठोंक रहे हैं।

धृतराष्ट्र: तो क्या कांग्रेस लालू के माय समीकरण के बगैर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
संजय: महाराज, बिहार की राजनीति में इन दिनों बहुत परिवर्तन आया है। लालू का माय समीकरण अक्षुण्ण है या नहीं यह तो चुनाव के बाद ही पता चल पाएगा, यह जरूर है कि नीतीश के विकास और धर्मनिरपेक्षता की राजनीति का फायदा उठाने की कोशिश में कांग्रेस लग गई है।

क्रमश:.......





Monday, May 25, 2015

संजय के द्वारा धृतराष्ट्र को बिहार की राजनीति का आंखों देखा हाल सुनाना



धृतराष्ट्र: कहो संजय बिहार की राजनीति में क्या चल रहा है इन दिनों, तुम क्या देख पा रहे हो अपनी आंखों से???

संजय: महाराज, सबकुछ वैसा ही हो रहा है जैसा हमलोगों ने पहले सोच रखा था। लोगों को जनता परिवार का जो तूफान आता दिख रहा था वह कमजोर सा पड़ गया है। गांधी मैदान तक भी नहीं पहुंच सका। एक बिल्डिंग पर बबंडर बना कर प्रदेश से उड़ चला है। जनता परिवाक नाम का तूफान। लोग अभी तक सहमे हुए हैं कि तूफान कहर बरपाएगा। लेकिन उन्हें नहीं पता कि तूफान खत्म हो चुका है। लोगों को यह समझने में कुछ वक्त लगेगा।

धृतराष्ट्र: साफ-साफ कहो धृतराष्ट्र!!! क्या महाविलय नहीं हो रहा है, क्या लालू-नीतिश नहीं मिल रहे हैं।

संजय: महाराज इन्हें तो कभी नहीं मिलना था। दरअसल मोदी की सरकार आने से इन्हें बहुत तेज झटका लगा था। झटका लगा तो हिलने लगे..। हिलते-हिलते दोनों नजदीक आ गए। अचानक इन्हें खयाल आया कि जब हम हिल रहे हैं तो और जोर से क्यों ना हिलें ताकि लोगों को लगे कि इनके हिलने से तूफान आ रहा है और फिर लोग कुच दिनों तक तूफान के मुगालते में रहे। बस यही कहानी है महाराज जनता परिवार और लालू-नीतिश की।


क्रमश:.......

Tuesday, May 19, 2015

Speech of Hukmdev Narayan Yadav on General Budget 2015-16

16.03.2015


आम बजट 20015-16 पर संसद में भाषण देते हुए मधुबनी के सांसद हुक्मदेव नारायण यादव।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार इतने हंसते हुए दिखाई दिए।

Musical Performance by Korean Group at Dinner Banquet in Republic of Korea


Chal Chal Mere Saathi in Korea




Korean Children perform at Dinner Banquet in honour of Prime Minister Narendra Modi

Sunday, May 10, 2015

शराब पीकर गाड़ी चला, फुटपाथ पर 'कुत्तों' को कुचल; जमानत तो अधिकार है

  1. घटना और तिथि: 28 दिसंबर 2002, रात के 2 बजे फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कुचला गया
  2. फैसले में लगा समय 13 साल
  3. अंतरिम बेल मिलने में लगा समय: 3 घंटे
  4. नियमित बेल मिलने में लग समय: 2 दिन
कलर्स के एक प्रोग्राम में सलमान खान
सलमान खान एक सुपरस्टार हैं। सच बताउं तो मैं खुद उनका बहुत बड़ा फैन हूं। यह जानते हुए कि उनकी अभिनय क्षमता औसत से थोड़ी कम ही है।

प्रत्येक स्टार की एक फैन फौलौइंग होती है। फैन अपने स्टार को परेशानी में नहीं देख सकते। उसे परेशान देखकर दुखी हो उठते हैं। बहुत सारे लोग तो अपने स्टार के लिए जीने मरने की बात भी करते हैं। कई तो जान दे भी देते हैं।

सलमान खान की फैन फौलौइंग बहुत बड़ी है। उनके फैन्स की संख्या में उनका भी नाम है जो उस काली राती में सलमान की गाड़ी के नीचे आए थे।

जिन्हें जाना था वे चले गए। तमाम कष्टों को झेलने के बाद घरवालों को उनके बिना जीने की आदत भी पड़ गई। जो जिंदा हैं हालात से समझौता कर चुके हैं। सलमान की कथित दरियादिली (Being Human) चैरिटि की खबरें देख-देख कर उनके घाव भर चुके हैं। अब वे भी सलमान के लिेए सजा नहीं चाहते।

उन्हें यह महसूस हो रहा है कि अगर सलमान जेल भी चले जाएं तो उनका कुछ भला नहीं होने वाला (उल्टा स्टार के जेल चले जाने से और दुखी हो जाएंगे)। इसलिए सलमान के लिए वे भी अब सजा नहीं चाहते। जो होना था वो तो हो चुका अब तो बस ये चाहते हैं कि इस पैसे वाले स्टार से दो-चार पैसे और मिल जाएं तो परिवार का कुछ भला हो जाए।
दोस्तों के साथ पार्टी बनाते सलमान खान की एक तस्वीर

अब बात जरा उन लोगों की जो चाहते हैं कि सलमान को कड़ी से कड़ी सजा मिले। हत्या हुई है, भले ही अनजाने में। वैसे भी अगर गैलन भर दारू डकार कर गाड़ी चला रहे हों और फुटपाथ पर सोने वालों को कुचल दें तो इसे तो गैरइरादन हत्या मानना भी नहीं चाहिए।

हाइवे से शराब की दुकाने हटाने की लड़ाई चल रही है। देश भर में शराब पीकर गाड़ी चलाने के खिलाफ अभियान जोरों पर है। जिस फैसले को आप इस अभियान के लिए एक नजीर बना सकते थे..। उसी फैसले से आपने अभियान की हवा निकाल दी। सलमान को बेल मिलने की रात में फुटपाथ पर सोए लोग जरूर बहुत घबराए होंगे। क्या पता रात में फिर से कोई स्टार शराब पीकर गैर इरादतन हत्या कर दे।

हां पता है, सलमान को सिर्फ बेल मिली है। सजा मुक्ति नहीं। लेकिन एक की हत्या हुई है। गैर इरादतन ही सही। और दोषी साबित होने के बाद भी जेल नहीं गया।


Saturday, April 18, 2015

तेजी से ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराने के लिए ट्राई की सिफारिशें



भारत फिक्‍सड ब्रॉडबैंड पहुंचाने के मामले में 125वें स्‍थान पर है। एक सौ की आबादी पर केवल 1.2 निर्धारित ब्रॉडबैंड है। विश्‍व का औसत प्रति सौ पर 9.4 का है। विकासशील देशों में घरों तक ब्रॉडबैंड की पहुंच के मामले में भारत 75वें स्‍थान पर है। देश के 13 प्रतिशत घरों में यह सेवा है। वायरलैस ब्रॉडबैंड में भी भारत का स्‍थान 113वां है और 100 की आबादी में ब्रॉडबैंड केवल 3.2 है। ''आईसीटी एक्‍सेस, आईसीटी यूज तथा आईसीटी स्किल'' मामले में भारत का स्‍थान कुल 166 देशों में 129वां है। इंडोनेशिया (106), श्रीलंका (116), सूडान (122), भूटान (123) और केन्‍या (124) के साथ भारत से ऊपर है।
भारत 42 देशों के समूह में ब्रॉड बैंड के मामले में काफी कम है।
कई हितसमूहों से विचार-विमर्श के बाद ट्राई ने तेजी से ब्रॉडबैंड देने के लिए निम्‍न सिफारिशें दी हैं:

संस्‍थागत बदलाव
1) डब्‍लयूपीसी को वर्तमान दूरसंचार विभाग से अलग करके स्‍वतंत्र संस्‍था बनाना चाहिए या इसे संसद के प्रति उत्‍तरदायी वैधानिक संस्‍था के रूप बदलना चाहिए या वर्तमान वैधानिक संस्‍था को हस्‍तांतरित कर देना चाहिए।
2) राष्‍ट्रीय परियोजना एनओएफएन के लिए विभिन्‍न स्‍तरों पर निर्णय लेना ऐसी परियोजना के लिए सही नहीं है जिसे मिशन मोड में लागू करना है।

स्‍पेक्‍ट्रम
1) स्‍पेक्‍ट्रम बैंडों को वैश्विक बैंडों से जोड़ना ताकि हस्‍तक्षेप रहित अस्तित्‍व बना रहे। हमारे एलएसए में स्‍पेक्‍ट्रम की वर्तमान उपलब्‍धता अन्‍य देशों की तुलना में 40 प्रतिशत है। स्‍पष्‍ट रूप से वाणिज्यिक दूरसंचार सेवाओं के लिए अतिरिक्‍त स्‍पेक्‍ट्रम देने की आवश्‍यकता है।

2) स्‍पेक्‍ट्रम प्रबंधन के लिए स्‍पष्‍ट दिशा तैयार करने की जरूरत है। इसमें पत्‍येक एलएसए तथा पूरे देश के लिए आवश्‍यकता और स्‍पेक्‍ट्रम की उपलब्‍धता होनी चाहिए। यह दिशा सार्वजनिक रूप से उपलबध कराई जानी चाहिए ताकि पार‍दर्शिता सुनिश्चित हो। सभी वाणिज्यिक स्‍पेक्‍ट्रम के साथ साथ सार्वजनिक उपक्रमों/सरकारी संगठनों को आवंटित स्‍पेक्‍ट्रम की ऑडिट स्‍वतंत्र एजेंसी से करानी की जरूरत है।

राइट ऑफ वे (आरओडब्‍ल्‍यू)
1) राज्‍य और केंद्र सरकार के स्‍तर पर आरओडब्‍ल्‍यू प्रस्‍तावों की एकल खिड़की मंजूरी आवश्‍यक। इस तरह की सभी मंजूरियां समयबद्ध तरीके से दी जानी चाहिए ताकि टीएसपी तथा अवसरंचना प्रदाता परियोजना लागू करने में तेजी से काम कर सकें। आरओडब्‍ल्‍यू मंजूरी से इनकार का कारण लिखित रूप से दिया जाना चाहिए।

एनओएफएन
1)केंद्र राज्‍य सार्वजनि‍क-निजी साझीदारी से परियोजना कार्यान्‍वयन में राज्‍य सरकारों और निजी क्षेत्र को शामिल किया जाना चाहिए।

टावर
1)राष्‍ट्रीय नेटवर्क का तेजी से विकास सुनिश्चित करने के लिए टावर लगाने के मामले में एकल खिड़की समयबद्ध मंजूरी को प्रोत्‍साहन दिया जाना चाहिए।
2)ईएमएफ विकिरण तथा स्‍वास्‍थ्‍य पर इसके प्रभाव के बारे में उपभोक्‍ताओं को व्‍यापक रूप से शिक्षित करना चाहिए।

फिकस्ड लाइन बीबी
1)फिकस्ड लाइन बीबी को प्रोत्‍साहित करने के लिए फिकस्ड लाइन बीबी से प्राप्‍त राजस्‍व पर लाइसेंस फीस में 5 वर्ष की छूट दी जानी चाहिए।

सीएटीवी
1)केबल ऑपरेटरों को आईएसपी लाइसेंस धारकों के रिसेलर के रूप में काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि केबल ऑपरेटर बीबी प्रदान करने के लिए अपने केबल नेटवर्क का लाभ उठा सकें।
2) दो और तीन स्‍तरीय शहरों में समयबद्ध रूप से केबल सेवाओं का डिजटीकरण।

सेटेलाइट
1) सेटेलाइट स्‍पेश डोमेन में लाइसेंसर, नियामक, तथा ऑपरेटर के काम अलग किये जाने चाहिए ताकि मुक्‍त बाजार के अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यवहारों के अनुरूप कार्य हो सके। डीओएस के साथ 2500-2690 मेगाहर्टज बैंड में अतिरिक्‍त स्‍पेक्‍ट्रम पर समन्‍वय आवश्‍यक।

भारत में कंटेंट होस्टिंग
1)सरकार को औद्योगिक पार्कों तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों की तर्ज पर डाटा सेंटर पार्क बनाने के लिए स्‍थानीय तथा विदेशी कंपनियों को भूमि तथा अन्‍य सुविधाएं देकर प्रोत्‍साहित करना चाहिए।

सार्वभौमिक अंगीकरण
1)केंद्र और राज्‍य सरकारों को ई-एजुकेशन, -गवर्नेंस, एम-हेल्‍थ, एम-बैंकिंग जैसी सेवाएं देकर मॉडल के रूप में काम करना चाहिए।
2) ब्रॉड बैंड सेवाएं देने के लिए स्‍कूल आदर्श हैं। ग्रामीण एवं दूर-दराज के सरकारी स्‍कूलों को ब्रॉड-बैंड कनेक्टिीविटी के लिए यूएसओएस से सब्सिडी दी जानी चाहिए।

3) सीपीई (डेस्‍क्‍टॉप/लैपटॉप/टैब्‍स) की कीमतें ब्रॉड बैंड सेवाओं की राह में प्रमुख बाधा है।

Sunday, April 12, 2015

ऑपरेशन यमन के हीरो


तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी,  तू न मुड़ेगा कभीl कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ


ऑपरेशन यमन (राहत) के जांबाज
ऑपरेशन खत्म होने के बाद समूह फोटो






Thursday, April 9, 2015

Copy of The Letter Written By Ramalinga Raju To Satyam Board Members on Jan 7, 2009








"यह बाघ की सवारी करने के समान था। यह नहीं जानता था कि बिना बाघ का निवाला बने कैसे बाघ से उतरूँ" 


















Tuesday, February 24, 2015

फिर से मैच शुरू होने का इंतजार रहने लगा है



अखबारों में फिर से क्रिकेट की खबरें पढ़ने लगा हूं...। फिर से मैच शुरू होने का इंतजार रहने लगा है। फिर से इंडिया के मैच वाले दिन अकर्मण्य की तरह बिस्तर में रिमोट और मोबाइल पकड़े लेटे रहता हूं। रिमोट से स्टार के क्रिकेट चैनलों की अदला-बदली और मोबाईल से ट्विटर पर अपडेट।

थोड़ा सा भी अनुमान नहीं था-- और अनुमान तो तब हो जब आपको भरोसा हो-- कि भारत वर्ल्ड कप की इतनी धमाकेदार शुरुआत करेगा।

और मैं ही क्यों क्रिकेट के किसी पंडित ने ऐसा नहीं सोचा था..। कम से कम मैने तो नहीं देखा किसी चैनल पर किसी एक्सपर्ट को यह कहते हुए कि भारत वर्ल्ड कप के शुरुआती दो मैचों में पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रिका को इस बुरी तरह से रौंदेगा।


पाकिस्तान के खिलाफ विश्वकप में भारत ने जहां अपनी जीत के सिलसिले को बरकरार रखा वहीं दक्षिण अफ्रिका के खिलाफ विश्वकप में हमेशा हारते रहने के धब्बे को मिटाने में कामयाब रहा।

टीम इंडिया के पर्फार्मेंस को आप इस बात से जोड़ सकते हैं, कि उसे ऑस्ट्रेलिया में दो महीने रहने का फायदा मिला। लेकिन ऐसा कहने वाले टीम की हार होने की सूरत में यह भी कह सकते थे कि ऑस्ट्रेलिया में दो महीने तक टीम इंडिया इतनी बुरी तरह से हारी कि उसका मनोबल टूट चुका था।

विश्वकप शुरू होने से तुरत पहले गावस्कर ने कहा था कि टीम इंडिया थकी-थकी सी लग रही है।
जरा सोचिए.... टीम इंडिया की हार हुई होती तो इनका रिएक्शन क्या हुआ होता...

लेकिन अचानक से सभी थके हुए योद्धा सामने वाली टीम को रौंदने लगे हैं..। पंडितों को झुठलाने लगे हैं। मैच देखना अच्छा लगने लगा है, थैंक्यू टीम इंडिया!